सडके नहीं है इस गाँव में, आने-जाने के लिए है नहरे

हेल्लो दोस्तों आज हम आपको कुछ रोचक से देश के बारे में जो आप ने आज तक कही भी देखा या सुना होगा । इस गाँव में इतना पानी 1170 की एक भयंकर बाढ में आया था लेकिन इस गाँव की स्थापना 1230 में हुई थी। जब लोग यहां पर रहने आये तो उन्हें यहां पर बहुत सारे जंगली बकरियों के सिंग मिले जो की सम्भवतया 1170 की बाढ में यहां बह कर आई होगी। इसलिए इस जगह का शुरूआती नाम पडा “गेटेनहोर्न” (Geytenhorn), जिसका मतलब होता है “बकरियों के सिंग”। बाद में इसका नाम गिएथूर्न ( (Giethroon) हो गया।

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कैसे बनी नहरे :
इन नहरों के बनने के पीछे की कहानी भी बडी दिलचस्प है, यहां पर इन नहरों का निर्माण अनजाने में ही हुआ। हुआ यूं की जब लोग यह पर रहने आये तो उन्होंने देखा की 1170 की बाढ़ के कारण यहां पर जगह जगह प्रचुर मात्रा में पिट इकाई ही गई है। पिट एक तरह की दलदली मिटटी और वनस्पतियों का मिश्रण होता है जो की ईंधन के रूप में काम में लिया जाता है। उन लोगो ने इस पिट को काम में लेने के लिए जगह जगह उसकी खुदाई करी। इस तरह खुदाई करते करते कई सालों में यहां पर नहरों का निर्माण हो गया। तब, शायद किसी को यह अंदाजा नहीं होगा कि पीट निकालने से बनी नहरों के कारण यह जगह दुनिया के नक्शे पर खूबसूरत पर्यटक स्थल के रूप में छा जाएगी। इस गांव से कुल 7.5 किलो मीटर लम्बी नहरें निकलती है।

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एक फिल्म से हुआ फेमस :
वर्ष 1958 में बर्ट हांस्त्रा की डच कॉमेडी फिल्म फेनफेयर (Fanfare) की शूटिंग यहां होने के कारण गिएथूर्न विशव स्तर पर प्रसिद्ध हो गया।


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